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कमाई का 62% तो केवल सैलरी पर खर्च करती हैं IT कंपनियां, अकेले TCS ने दी 1 लाख करोड़ से ज्यादा की सैलरी


 आईटी सेक्टर में भारत की कंपनियां दुनिया में डंका बजा रही हैं. सैलरी के मामले में भी यह बूमिंग सेक्टर है. वित्त वर्ष 2021-22 इंडियन आईटी सेक्टर की कंपनियों (IT sector companies) ने 62 फीसदी कमाई सैलरी पर खर्च कर दिए. इस सेक्टर की कंपनियों ने 3 लाख करोड़ तो केवल सैलरी के रूप में दिए हैं. पिछले पांच सालों के प्रदर्शन पर गौर करें तो इंडियन आईटी कंपनियों का रेवेन्यू दोगुना हो गया है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियां का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है. रेवेन्यू में भारी बढ़ोतरी के बावजूद इनके प्रॉफिट में उतना बड़ा उछाल नहीं आया है. बता दें कि पिछले पांच सालों में इन कंपनियों ने 12 लाख करोड़ से ज्यादा की सैलरी बांटी है. भारत के निर्यात और जीडीपी में आईटी सेक्टर का योगदान लगातार बढ़ रहा है. भारत के कुल निर्यात में सर्विस सेक्टर निर्यात का योगदान 40 फीसदी के करीब है. सर्विस एक्सपोर्ट में 50 फीसदी योगदान केवल आईटी सेक्टर का है.

वित्त वर्ष 2021-22 में इंडियन आईटी कंपनियों ने अपनी कमाई का 62 फीसदी केवल सैलरी पर खर्च किया. आईटी कंपनियों की कुल कमाई 5.5 लाख करोड़ रुपए हुई, जिसमें 3 लाख करोड़ सैलरी के रूप में खर्च कर दी गई. नैसकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में इंडियन आईटी कंपनियों ने कुल 22 लाख करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया. इसमें से 12 लाख करोड़ रुपए सैलरी पर खर्च कर दिए गए. आईटी सेक्टर का इनकम-सैलरी रेशियो सबसे ऊंचा है. उसके बाद बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेंज एंड इंश्योरेंस यानी BFSI का स्थान आता है. बीएफएसआई ने कमाई का 50 फीसदी सैलरी के रूप में खर्च किया.

TCS ने अकेले सैलरी पर खर्च किए 1 लाख करोड़

वित्त वर्ष 2021-22 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अकेले 1 लाख करोड़ से ज्यादा का सैलरी बांटा. टीसीएस ने 107554 करोड़ की सैलरी दी. उसके बाद इन्फोसिस ने 63986 करोड़ की, एचसीएल टेक्नोलॉजी ने 46130 करोड़, विप्रो ने 45008 करोड़, टेक महिंद्रा ने 22286 करोड़, एलएंडटी इन्फोटेक ने 9701 करोड़ और माइंडट्री ने 6328 करोड़ सैलरी के रूप में खर्च किए.

पांच सालों में किस कंपनी ने कितनी सैलरी दी

पिछले पांच सालों के प्रदर्शन पर गौर करें तो टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की कमाई 782447 करोड़ रही, जिसमें उसने 55 फीसदी यानी 429962 करोड़ सैलरी के रूप में खर्च किए. इन्फोसिस ने पांच सालों में 466281 करोड़ की कमाई की और सैलरी के रूप में 55 फीसदी यानी 245622 करोड़ खर्च किए. एचसीएल टेक्नोलॉजी ने 342702 करोड़ की कमाई की और 178923 करोड़ खर्च किए, एलएंडटी इन्फोटेक ने 55671 करोड़ की कमाई की और 33438 करोड़ खर्च कर दिए. माइंडट्री ने 38742 करोड़ की कमाई की और 24491 करोड़ खर्च कर दिए. माइंडट्री और एलएंडटी इन्फोटेक जैसी छोटी कंपनियां कमाई का 63 और 60 फीसदी सैलरी पर खर्च की हैं.

10 लाख करोड़ की सैलरी बांटी गई

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में देश की टॉप-500 कंपनियों ने सैलरी पर 10.80 लाख करोड़ रुपए खर्च किए. बीते आठ सालों में यह सबसे तेज बढ़ोतरी है. इस सैलरी में सबसे ज्यादा खर्च आईटी कंपनियों ने की है. टेक्नोलॉजी सेक्टर का इसमें योगदान 31.3 फीसदी, उसके बाद BFSI का योगदान 22.6 फीसदी, ऑटोमोबाइल्स का योगदान 6.3 फीसदी, मेटल्स का योगदान 5.1 फीसदी, यूटिलिटी का योगदान 5.5 फीसदी और अन्य का योगदान 28.8 फीसदी है.

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