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सेबी ने विदेशी निवेशकों के लिए नियमों में किए बदलाव, 9 मई से होंगे लागू

 

सेबी ने विदेशी निवेशकों के लिए नियमों में किए बदलाव, 9 मई से होंगे लागू

बाजार नियामक सेबी (Sebi) ने विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) के पंजीकरण प्रमाण पत्र और उनके नाम में बदलाव से संबंधित डिपॉजिटरी प्रतिभागियों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के परिचालन दिशा-निर्देशों में कुछ बदलाव किए हैं. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने शुक्रवार को जारी एक सर्रकुलर में इन बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा है कि नए दिशा-निर्देश (New Rules) 9 मई से लागू होंगे. सेबी के सर्रकुलर के मुताबिक, एफपीआई के पंजीकरण (Registration) के प्रमाण पत्र और उनके नाम में बदलाव से संबंधित ढांचे को संशोधित किया गया है।

एफपीआई के लिए पंजीकरण प्रमाण पत्र के संबंध में नामित डिपॉजिटरी प्रतिभागी (डीडीपी) पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्रदान करेगा, जिस पर सेबी की तरफ से जारी पंजीकरण संख्या का उल्लेख होगा.

प्रमाण पत्र में नाम कब बदलेगा?

सेबी ने कहा कि किसी एफपीआई के नाम में बदलाव होने की स्थिति में डीडीपी ऐसा अनुरोध मिलने के बाद प्रमाण पत्र में नाम परिवर्तन करेगा।

इसके पहले जनवरी में सेबी ने एफपीआई पंजीकरण संख्या के सृजन के लिए नियम अधिसूचित किए थे. उसके बाद वित्त मंत्रालय ने मार्च में कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म (सीएएफ) में संशोधन किया. उसी को लागू करने के लिए सेबी ने परिचालन दिशानिर्देशों में यह संशोधन किया है।

इसके अलावा आपको बता दें कि मार्केट रेग्युलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने अप्रैल में सोने और सोने से संबंधित निवेश के ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स में जोखिम का स्तर मानपने के लिए फ्रेमवर्क जारी किया था, जिनमें म्यूचुअल फंडपैसा लगाते हैं. इनके रिस्क स्कोर को देखकर ही म्यूचुअल फंड कंपनियां इनमें निवेश करती हैं. ऐसी कमोजिटीज में रिस्क वैल्युएशन करने के लिए तत्काल प्रभाव से रिस्क-ओ-मीटर लागू हो गया है. सेबी ने एक सर्कुलर में कहा कि म्यूचुअल फंड द्वारा ऐसे कमोडिटीज में निवेश को एक जोखिम स्कोर दिया जाएगा. यह इन कमोडिटीज की कीमत में रही सालाना उठापटक के आधार पर होगा, जिसकी गणना तिमाही आधार पर होगी।

सेबी के मुताबिक, कमोडिटीज की कीमतों में रही सालाना उठापटक की गणना तिमाही आधार पर कमोडिटीज के मानक सूचकांक की 15 वर्षों की कीमतों पर की जाएगी. इन कमोडिटीज के लिए रिस्क को चार स्तरों में बांटा जाएगा जो मोडरेट से लेकर वेरी हाई तक होंगे।

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