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छोटे दुकानदार भी ऑनलाइन बेच सकते हैं प्रोडक्ट्स, सरकार ने लॉन्च किया नेटवर्क

 

छोटे दुकानदार भी ऑनलाइन बेच सकते हैं प्रोडक्ट्स, सरकार ने लॉन्च किया नेटवर्क

इस प्रोजेक्ट में सरकार की मदद नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। वह इंफोसिस के को-फाउंडर हैं। वह बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन प्रोजेक्ट में सरकार की मदद कर चुके हैं।

देश के करोड़ों छोटे दुकानदारों की शिकायत दूर होने जा रही है। अब वे भी अपने प्रोडक्ट्स ऑनलाइन बेच सकेंगे। इससे उनकी पहुंच गल्ली-मोहल्ले के निकल करोड़ों ग्राहकों तक हो जाएगी। सरकार ने इसके लिए शुक्रवार को पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च कर दिया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

सरकार ने शुक्रवार को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च कर दिया। इसे देश के पांच शहरों में लॉन्च किया गया है। इसका मकसद ई-कॉमर्स में छोटे-बड़े सभी सेलर्स को एक समान मौका मुहैया कराना है।

अभी ई-कॉमर्स में अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों का दबदबा है। इन दोनों कंपनियों ने बिजनेस में अरबों रुपये इनवेस्ट किए हैं। वे जिसे चाहती हैं, उसे अपने प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट्स बेचने का मौका देती हैं। इससे देश के करोड़ों छोटे विक्रेता और दुकानदार उनका मुकाबला नहीं कर पाते, जिनके पास उनके जितना पैसे नहीं हैं।

कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा, "हम UPI की तरह ई-कॉमर्स को भी डेमोक्रेटाइज करना चाहते हैं। आज चुनिंदा कंज्यूमर्स, सेलर्स और लॉजिस्टिक प्रोवाइडर्स के लिए ONDC की सॉफ्ट लॉन्चिंग की जा रही है।" माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के सफल रहने पर ई-कॉमर्स की दुनिया की तस्वीर बदल जाएगी।

पायलट चरण में ONDC को पांच शहरों दिल्ली, एनसीआर, बेंगलुरु, भोपाल, शिलंग और कोयंबतूर में लॉन्च किया गया है। शुरआत में इससे 150 रिटेलर्स को जोड़ने का टारगेट है। अग्रवाल ने कहा कि इस लॉन्चिंग से हम यह देखना चाहते हैं कि रियल लाइफ इनवायरमेंट में यह किस तरह काम करता है। किस तरह आप पेमेंट करते हैं, कैसे डिलीवरी होती है, कैसे ऑर्डर कैंसिल किए जाते हैं।

कम से कम 20 बैंकों और वित्तीय संस्थाओं ने ONDC में 255 करोड़ रुपये इनवेस्ट करने का वादा किया है। इनमें एसबीआई, यूको बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बैंक और बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक शामिल हैं।

इस प्रोजेक्ट में सरकार की मदद नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। वह इंफोसिस के को-फाउंडर हैं। वह बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन प्रोजेक्ट में सरकार की मदद कर चुके हैं। सरकार ऐसा ऑनलाइन सिस्टम बनाना चाहती है, जहां 10 रुपये के साबुन से लेकर हजारों रुपये के एयरलाइंस के टिकट को खरीदना और बेचना मुमकिन होगा।

एमेजॉन और फ्लिपकार्ट ने इंडिया में 24 अरब डॉलर इनवेस्ट किया है। ऑनलाइन रिटेल मार्केट के 80 फीसदी हिस्से पर उनका कब्जा है। ये दोनों प्रोडक्ट्स पर ज्यादा डिस्काउंट देती हैं। ये कुछ खास विक्रेताओं को आगे बढ़ने का मौका देती हैं। इससे किराना दुकानदारों को भविष्य की चिंता सता रही है।

अभी रिटेल मार्केट में ऑनलाइन कॉमर्स की सिर्फ 6 फीसदी हिस्सेदारी है। लेकिन, छोटे दुकानदारों का मानना है कि धीरे-धीरे उनका वजूद खत्म हो जाएगा। अमेरिका और दूसरे देशों में ऐसा हो चुका है। इसी प्रॉब्लम को ध्यान में रख सरकार ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) बनाया है। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला नेटवर्क है।

नीलेकणि ने हाल में एक इंटरव्यू में इस बारे में कहा था, "यह ऐसा आइडिया है, जिसका टाइम आ गया है। हमें तेजी से बढ़ने वाले डिजिटल कॉमर्स में करोड़ों छोटे दुकानदारों के पार्टिसिपेशन के लिए सिस्टम बनाना होगा।" इस बारे में एमेजॉन के प्रवक्ता ने कहा, "हम इस मॉडल को अच्छी तरह से समझने की कोशिश कर रहे हैं। हम यह देखना चाहते हैं कि हमारी इसमें क्या भूमिका होगी।" फ्लिपकार्ट ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया।

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