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क्या होता है कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के लिए क्यों जिम्मेदार माना जाता है ! जानें कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 4 बड़े संकेत

 

क्या होता है कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के लिए क्यों जिम्मेदार माना जाता है ! जानें कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 4 बड़े संकेत

कोलेस्ट्रॉल एक लुब्रिकेंट की तरह होता है, जिसका निर्माण लिवर करता है. ये शरीर में हॉर्मोन्स को कंट्रोल करता है, सूरज की रोशनी को विटामिन डी में बदलता है और ब्रेन के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को हार्ट डिजीज और ब्रेन की समस्याओं की बड़ी वजह माना जाता है क्योंकि ज्यादा होने पर ये शरीर में घुलता नहीं, बल्कि नलिकाओं में जमने लगता है और वाहिकाओं का रास्ता संकरा कर देता है. इसके कारण शरीर में रक्त संचार ठीक तरीके से नहीं हो पाता. ऐसे में ये हार्ट और ब्रेन की तमाम समस्याओं की वजह बनता है. इसलिए इसे कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है. यहां जानिए वो लक्षण जो आपको बताते हैं कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ चुका है. इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

सांस फूलना और छाती में दर्द

अगर जरा सा चलने पर आपकी सांस फूलने लगती है या आपको छाती में दर्द होता है ​तो ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का संकेत हो सकता है. रक्त वाहिकाएं संकरी होने के कारण जब रक्त संचार ठीक से नहीं हो पाता, तो हार्ट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. ऐसे में सीने में दर्द, थकान या सांस फूलने की परेशानी हो सकती है.

बीपी बढ़ना और पसीना

अगर आपका बीपी बीते कुछ दिनों से अचानक बढ़ने लगा है, तो आपको एक बाद अपने कोलेस्ट्रॉल की जांच एक बार जरूर करा लेनी चाहिए. इसके अलावा आपको कुछ समय से पसीना ज्यादा आने लगा है, तो ये भी कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने का संकेत हो सकता है. ब्लड प्रेशर का बढ़ना, पसीना ज्यादा आना और बेचैनी महसूस करना भी बढ़े कोलेस्ट्रॉल की ओर इशारा करता है.

पैरों में सूजन

पैरों में सूजन, दर्द और ऐंठन को भी बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का एक लक्षण माना जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसी कोई समस्या रोज रोज हो रही है, तो लापरवाही किए बगैर विशेषज्ञ से परामर्श करें और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं.

आंखों के आसपास पीलापन

अगर आपकी आंखों के आसपास पीलापन लिए हल्की गांठें जैसी बन रही हैं, तब आपको एक बार अपने कोलेस्ट्रॉल की जांच करवा लेनी चाहिए. ये गांठें वसा का रूप होती हैं. इसलिए इसे किसी लक्षण को नजरअंदाज न करें.

जानिए कितना होना चाहिए कोलेस्ट्रॉल का स्तर

आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल दो तरह के होते हैं. एक एचडीएल जिसे गुड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है और दूसरा एलडीएल जिसे बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है. गुड कोलेस्ट्रॉल हमारी सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. ये हमारे कोरोनरी हार्ट डिजीज और स्ट्रोक को रोकने में हमारी मदद करता है. जबकि बैड कोलेस्ट्रॉल हाई बीपी और हार्ट डिजीज की वजह बनता है. हालांकि गुड कोलेस्ट्रॉल हो या बैड, दोनों को ही नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है. शरीर में टोटल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 200 mg/dl से कम होना चाहिए. ​इसमें एलडीएल 100 mg/dl से कम, एचडीएल 60 mg/dl से ज्यादा और ट्राइग्लिसराइड 150 mg/dl से कम होना चाहिए

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