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डिविडेंड का खेलः घाटे वाली कंपनियां भी दे रही लाभांश, आम निवेशकों से ज्यादा प्रमोटर्स को फायदा

 


नई दिल्ली. शेयर निवेशकों को कंपनी की ओर से दिए जाने वाले डिविडेंड का इंतजार रहता है. आमतौर पर ज्यादातर कंपनियां वित्त वर्ष समाप्त होने पर अंतिम डिविडेंड देने की घोषणा करती हैं. वित्त वर्ष 2021-22 के समाप्त होने के बाद वित्तीय नतीजों की घोषणा करते हुए कई कंपनियों ने शेयरधारकों को डिविडेंड देने की घोषणा कर दी है. इनमें कई ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जो घाटे में चल रही हैं.

आमतौर पर मुनाफा अर्जित करने वाली कंपनियां अपना मुनाफा शेयरधारकों से डिविडेंड के रूप में शेयर करती हैं. मगर जब घाटे वाली कंपनियां ऐसा करती हैं तो आम लोगों के मन में यह संदेह जरूर उठता है कि ये कंपनियां ऐसा क्यों कर रही हैं. दरअसल, इसके पीछे बहुत बड़ा खेल नजर आता है.

क्या है डिविडेंड का खेल

दरअसल, ऐसी कंपनियों में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी ज्यादा होती है. ऐसे में डिविडेंड का बड़ा हिस्सा प्रमोटर्स के खाते में जाता है यानी आम शेयरधारकों की तुलना में प्रमोटर्स को ज्यादा फायदा होता है. इसलिए घाटे के बावजूद ये कंपनियां डिविडेंड देने की घोषणा कर देती हैं. वित्त वर्ष 2022 में घाटे में रहने के बावजूद कई कंपनियों ने इसकी सिफारिश की है. हालांकि, इन्हें अभी शेयरधारकों की मंजूरी नहीं मिली है. इन कंपनियों में प्रमोटर्स की 38 फीसदी से 73 फीसदी तक हिस्सेदारी है.

मनी कंट्रोल ने 11 ऐसी कंपनियों का विश्लेषण किया है जिन्हें वित्त वर्ष 2022 में एकल आधार पर घाटा हुआ है. इसके बावजूद इन्होंने डिविडेंड देने की घोषणा की है. हालांकि, एकीकृत आधार पर इन्हें मुनाफा हुआ है क्योंकि इनकी कुछ सब्सिडियरियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है. इन कंपनियों में भारती एयरटेल, ल्यूपिन फार्मा, रेमंड, इंडियन होटल्स, नोवार्टिस इंडिया, जेएमसी प्रोजेक्ट्स इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं. भारती एयरटेल और ल्यूपिन क्रमश: 1,765 करोड़ रुपये और 182 करोड़ रुपये का डिविडेंड पे-आउट देगी. भारती एयरटेल में प्रमोटर्स का हिस्सा 56 फीसदी है. ऐसे में 1,765 करोड़ रुपये में से 987 करोड़ रुपये प्रमोटर्स के खाते में जाएगे. जबकि ल्यूपिन में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 47 फीसदी है यानी कुल डिविडेंड पे-आउट में से 85 करोड़ रुपये उनके हिस्से में जाएंगे.

क्या कहते हैं नियम

कंपनी एक्ट के मुताबिक, शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियां डिविडेंड देने के लिए अपने एकीकृत आय का उपयोग कर सकती हैं. एकल आधार पर हुई आमदनी का भी डिविडेंड देने में इस्तेमाल हो सकता है. एमएमजेसी एंड एसोसिट्स के मकरंद जोशी के मुताबिक, कंपनी एक्ट में यह भी प्रावधान है कि कंपनियां या तो अपने चालू वित्त वर्ष के मुनाफे से या पिछले वित्त वर्ष के उस मुनाफे से डिविडेंड दे सकती हैं जो कंपनी के लेखे-जोखे में अभी दर्ज नहीं है. घाटे वाली कंपनियां रिजर्व में कैरी फॉरवर्ड किए गए मुनाफे से डिविडेंड दे सकती हैं लेकिन कुछ शर्तों के साथ. उदाहरण के लिए, घाटे वाली कंपनी द्वारा दिया जा रहा डिविडेंड पिछले 3 साल के औसत से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

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