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Daily Voice: यह बॉटम फिशिंग का बाजार नहीं, क्वालिटी शेयरों के साथ बाजार में रहें बनें- अभय अग्रवाल

 

Daily Voice: यह बॉटम फिशिंग का बाजार नहीं, क्वालिटी शेयरों के साथ बाजार में रहें बनें- अभय अग्रवाल


डॉलर में मजबूती और रुपये में गिरावट से सिर्फ एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को ही फायदा नहीं होगा बल्कि उन कंपनियों को भी फायदा होगा जो इंपोर्ट का विकल्प होती है

Piper Serica के फाउंडर और फंड मैनेजर अभय अग्रवाल ने मनीकंट्रोल से हुई अपनी एक बातचीत में कहा है कि मौजूदा स्तरों से कमोडिटी की कीमतों में आने वाला कोई बड़ा उछाल बाजारों के लिए एक बड़ा निगेटिव सरप्राइज होगा क्योंकि केद्रीय बैंक मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने के लिए अंतिम उपाय के रुप में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प अपनाएंगे और दरों में यह बढ़ोतरी अंतत: अर्थव्यवस्थाओं को मंदी की और जाने के लिए मजबूर करेगा।

इस बातचीत में जब अभय अग्रवाल से पूछा गया कि क्या इस समय हमें गिरावट पर खरीद करनी चाहिए या फिर किसी उछाल में बिकवाली करनी चाहिए तो उन्होंने इस सवाल के जवाब में कहा है कि Tiger Global जैसे बड़े हेज फंड भारी परफॉर्मेंश प्रेशर के दौर में काम कर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि बाजार में आने वाले किसी भी उछाल को इस तरह के फंड बिकवाली के मौके के तौर पर इस्तेमाल करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह बाजार बॉटम फिशिंग का बाजार नहीं है। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि बाजार में इस तरह का अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले 12 महीने महंगाई का दबाव बना रहेगा और केंद्रीय बैंक अपने दरों में बढ़ोतरी का रुख बनाए रखेंगे। यूएस फेड भी दरों में बढ़ोतरी करता नजर आएगा।

दूसरी तरफ बाजार में एक अनुमान यह भी है कि कमोडिटी की कीमतें अपने सिक्लिकल पीक पर पहुंच गई हैं और अब इनमें धीरे-धीरे गिरावट आएगी। ऐसे में अब अगर यहां से कमोडिटी की कीमतों में कोई उछाल आता है तो यह बाजार के लिए एक नेगेटिव सरप्राइज होगा।

बाजार पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अगले कुछ महीनों के दौरान बाजार काफी वोलेटाइल रहेगा क्योंकि यह अपना बॉटम हासिल करने की खोज में नजर आ रहा है। इसी समय यह देखकर राहत हो रही है कि वॉरेन बफेट जैसे लंबी अवधि के निवेशक अंतत: एक बार फिर निवेश की शुरुआत करते दिख रहे हैं। यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इस बात का संकेत है कि वे बॉटम खोजने की तलाश छोड़कर धीरे-धीरे किस्तों में निवेश करना शुरु करें।

आगे किन स्टॉक्स पर रहे नजर इस पर बात करते हुए अभय अग्रवाल ने कहा कि पावर स्टॉक सिक्लिकल यानी इकोनॉमी से जुड़े स्टॉक होते हैं। 2020 में कोविड -19 के शुरुआत से ही ये ओवरसोल्ड नजर आ रहे थे। तब से निवेशका का यह मानना है कि लॉकडाउन के चलते पावर स्टॉक पर निगेटिव असर पड़ेगा। हालांकि इस समय पावर की खपत अपने रिकॉर्ड हाई पर नजर आ रही है। ऐसे में पावर डिमांड और उसकी दरों में आई तेजी के चलते पावर कंपनियों को फायदा हो रहा है। हालांकि ऐसा लग रहा है कि पावर की यह डिमांड अपने पीक पर पहुंच गई है। इसके अलावा कोयले की बढ़ती लागत के चलते पावर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि जो निवेशक पावर स्टॉक्स की पार्टी में शामिल होना चाहते थे उनके लिए अब देर हो चुकी है।

निवेशकों को इस समय क्वालिटी शेयरों के साथ बने रहना चाहिए। ऐसे शेयरों का चुनाव करें जिनका कैश फ्लो स्थिर है और जिनकी बैलेंस शीट पर कर्ज का दबाव नहीं है। बाजार में आ रही लगातार गिरावट के बीच सट्टे वाले ऐसे स्टॉक्स में गिरावट देखने को मिलेगी जिनके फंडामेंटल कमजोर हैं। इन स्टॉक्स में होने वाले नुकासन की भरपाई नहीं हो पाएगी।

दूसरी तरफ ऐसी कंपनियां प्रोडक्ट और प्रोसेस में नए तरीके अपना कर महंगाई वाले दौर में भी अपने मार्जिन को मजबूत बनाए रख पाएंगी उनकी बाजार हिस्सेदारी में बढ़त देखने को मिलेगी। बाजार को कुछ ऐसे सेगमेंट हैं जिनमें आगे हमें मजबूती देखने को मिलेगी। इनमें हेल्थकेयर, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी सर्विसों के एक्सपोर्ट करने वाले, फार्मा, डोमेस्टिक ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े शेयर शामिल हैं।

एक ऐसे माहौल में जहां ब्याज दरें बढ़ रही हों और पूंजी का लागत तेजी पकड़ रही हो, ऐसी कंपनियों से दूर रहने की सलाह होगी जिनके बैलेंस शीट पर कर्ज का बहुत ज्यादा भार हो और जिनको अपनी ग्रोथ के लिए उधार लेनें की जरूरत हो। डॉलर में मजबूती और रुपये में गिरावट से सिर्फ एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को ही फायदा नहीं होगा बल्कि उन कंपनियों को भी फायदा होगा जो इंपोर्ट का विकल्प होती है।

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