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पहले रॉकेट की तरह भाग रहे थे, अब क्यों गिरावट में हैं अडानी विल्मर के शेयर?

 

पहले रॉकेट की तरह भाग रहे थे, अब क्यों गिरावट में हैं अडानी विल्मर के शेयर?

हमेशा खबरों में बना रहने वाला अडानी ग्रुप अब फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कुछ ओर है. गौतम अडानी की एडिबल ऑयल कंपनी अडानी विल्मर (Adani Wilmar) का शेयर निवेशकों की जेब भरने के बाद अब उन्हीं की जेब काट रहा है. 12 मई को कंपनी का शेयर BSE पर करीब 5 फीसदी और टूट गया. अडानी विल्मर के शेयरों (Adani Wilmar Share) में गिरावट का सिलसिला 27 अप्रैल को शुरू हुआ, जो अगले 8 कारोबारी सत्रों तक लगातार जारी रहा. नौंवे कारोबारी सत्र यानी 11 मई को शेयरों में थोड़ी तेजी आई, लेकिन ज्यादा टिक नहीं पाई।

इस साल 8 फरवरी को शेयर बाजारों में लिस्ट होने के बाद से अडानी विल्मर का शेयर रॉकेट की तरह भाग रहा था. फिर यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से बढ़ी महंगाई ने खाद्य तेल की सप्लाई और डिमांड पर प्रतिकूल असर डाला. इसके बाद जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट सामने आई और अडानी विल्मर के बुरे दिन शुरू हो गए. अब आइए जानते हैं जेपी मॉर्गन ने आखिरी अपनी रिपोर्ट में ऐसा क्या कहा जिससे शेयरों में धड़ाधड़ बिकवाली शुरू हो गई।

शेयर प्राइस घटाया गया,

ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अडानी विल्मर का रिस्क-रिवार्ड अब ज्यादा आकर्षक नहीं रहा. इसलिए इसकी रेटिंग को घटाकर अंडरवेट कर दिया गया. जेपी मॉर्गन ने शेयर प्राइस का टारगेट भी घटाकर 525 रुपये कर दिया, हालांकि रिपोर्ट में कहा गया कि है कि लंबी अवधि के नजरिए से कंपनी के कारोबार का भविष्य अच्छा है. लिस्टिंग के बाद तेज रैली से कंपनी का वैल्यूएशन महंगा हुआ है. वित्त वर्ष 2024 का अनुमानित प्राइस टू अर्निंग रेश्यो बढ़कर करीब 70 गुना हो गया है और यही वजह है कि अब कंपनी का रिस्क-रिवार्ड आकर्षक नहीं बचा है।

अडानी विल्मर का शेयर 8 फरवरी को अपने IPO प्राइस 230 के मुकाबले 227 रुपये पर लिस्ट हुआ था. इसके बाद शेयर ने 28 अप्रैल को 878 रुपये का हाई लेवल छुआ था. आज ये शेयर अपने हाई से करीब 295 रुपये नीचे आ चुका है।

Adani Wilmar के शेयर का प्रदर्शन

52 हफ्ते की ऊंचाई – 878 रुपये

12 मई का प्राइस – 581.8 रुपये

हाई से गिरावट -33.7%

शेयर में किस-किस कंपनी की हिस्सेदारी,

कंपनी का शेयर अभी 50 दिन, 100 दिन और 200 दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर लेकिन 5 दिन और 20 दिन के मूविंग एवेरज के नीचे ट्रेड कर रहा है. अडानी विल्मर भारत के अडानी ग्रुप और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप के बीच एक ज्वॉइंट वेंचर है. इसमें दोनों ग्रुपों की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी है. अडानी विल्मर फॉर्च्यून ब्रांड से देश में एडिबल ऑयल, आटा, बेसन, चावल, दालें, चीनी और पैक्ड फूड की बिक्री करती है।

कम हुआ मुनाफा,

इस साल जनवरी में कंपनी ने IPO से 3600 करोड़ रुपये जुटाए थे. वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में अडानी विल्मर का मुनाफा 26 फीसदी गिरकर 219 करोड़ रुपये रहा. कंपनी ने मुनाफे में गिरावट का कारण अधिक टैक्स देनदारी बताई है. हालांकि इस दौरान परिचालन से कंपनी का राजस्व 40 फीसदी बढ़कर 14,960 करोड़ रुपये रहा।

अडानी विल्मर ने हाल ही में मशहूर बासमती चावल ब्रांड कोहिनूर और चारमीनार का अधिग्रहण किया है. राजस्व के मामले में ये कंपनी हिंदुस्तार यूनीलिवर को पीछे छोड़कर देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी भी बन गई है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन का मानना है कि इस अधिग्रहण से कंपनी को प्रीमियम बासमती चावल मार्केट में अपनी स्थिति और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

एक्यूमुलेटेड रेटिंग मिली,

घरेलू ब्रोकरेज फर्म केआर चौकसे ने अडानी विल्मर को एक्यूमुलेट रेटिंग दी है, उसका कहना है कि मौजूदा स्तर से शेयर 26 फीसदी या करीब 150 रुपये ऊपर जा सकता है और ये 734 का स्तर छू सकता है. ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि अडानी विल्मर की कच्चे माल की आपूर्ति बेहतर बनी रहेगी क्योंकि उसके पास एक मजबूत बिजनेस नेटवर्क है. कंपनी अपना 70 फीसदी कच्चा माल आयात करती है और इसकी मार्केट में अच्छी स्थिति इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टॉप ग्लोबल सप्लायर्स से कच्चा माल हासिल करने में मदद करेगी।

केआर चौकसे का कहना है कि अडानी विल्मर का पूरा ध्यान एफएमसीजी और पैक्ड फूड बिजनेस के ग्रोथ पर है. वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की दम पर कंपनी अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाएगी जिससे मार्जिन भी बढ़ेगा. कंपनी ने आईपीओ से मिले पैसे से अपना कर्ज चुका दिया है. कंपनी की मजबूत कैश फ्लो जनरेट करने की क्षमता और घटता कर्ज इसकी बैलेंस शीट को मजबूत बनाएगी।

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