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कई बड़े शहरों में आवासीय भूखंडों के दामों में इजाफा

 

कई बड़े शहरों में आवासीय भूखंडों के दामों में इजाफा

आवासीय भूखंडों की कीमतें पिछले दो वर्षों में दोगुनी या तीन गुनी तक बढ़ चुकी हैं। बेंगलूरु और गुरुग्राम जैसे शहरों और महाराष्ट्र के पर्यटक गंतव्यों में मजबूत मांग के कारण महज एक वर्ष के भीतर ही दाम दोगुने हो गए हैं। यह जानकारी संपत्ति परामर्शकों और डेवलपरों

ने दी है। उनका कहना है कि आईटी उद्योग में आमदनी बढऩे और महामारी के बाद स्वतंत्र आवासों को प्रमुखता देने वाले परिवारों की वजह से मांग बढ़ रही है।

एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टैंट्स के अनुमानों से संकेत मिलता है कि ऐसे भूखंडों की बिक्री महामारी की शुरुआत के बाद से तीन से चार गुना बढ़ चुकी है। एनरॉक में भूमि सेवाओं के मुख्य कार्याधिकारी मयंक सक्सेना ने कहा कि बेंगलूरु में आवासीय भूखंडों की औसत कीमतें पिछले दो वर्षों में 2,000 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़कर 4,500 वर्गफुट हो चुकी है। इस प्रकार इसमें 2.25 गुने की वृद्घि हो चुकी है।

सक्सेना ने कहा, 'बेंगलूरु में जिन तकनीकी विशेषज्ञों ने नौकरी बदली है उन्हें पिछले वेतन के मुकाबले पांच गुना वेतन मिलता है। जिन लोगों ने नौकरी नहीं बदली है उनके वेतन में तीन गुने का इजाफा हुआ है और नियोक्ताओं का वेतन दोगुना हो गया है। आमदनी का स्तर ऊपर गया है। यह सारा पैसा रियल एस्टेट में आ रहा है।' बेंगलूरु स्थित प्रेस्टीज एस्टेट ने पिछले वर्ष अपनी ग्रेट एकर्स परियोजना के तहत एक दिन में 808 भूखंड बेचे थे।

गुरुग्राम में पिछले दो वर्ष में औसतन भूखंडों की कीमतें 60,000 रुपये प्रति वर्गगज से बढ़कर 65,000 रुपये प्रति वर्गगज (6,666 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़कर 7,222 रुपये प्रति वर्गफुट) से 1,70,000 रुपये (18,888 प्रति वर्गफुट) से 1,80,000 रुपये प्रति वर्गगज (20,000 रुपये प्रति वर्गफुट) हो गई है। इस प्रकार कीमतों में 2.8 गुने की वृद्घि हुई है। एक वर्गगज नौ वर्गफुट के बराबर होता है।

गुरुग्राम में गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड खरीदारों के लिए सबसे आकर्षक जगह के तौर पर उभरा है जिसके बाद सोहना रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे का स्थान आता है। सक्सेना ने कहा, 'भारी मांग की वजह से बहुत सारे नए डेवलपर्स गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन में आए हैं।' उन्होंने कहा कि आईटी कंपनियां कुछ मामलों में हफ्ते में दो बार दफ्तर खोल रहे हैं और इस वजह से आईटी कर्मचारी मुख्य क्षेत्रों से किनारे के क्षेत्रों की ओर जाने लगे हैं। हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा के संस्थापक अभिनंदन लोढ़ा ने कहा कि महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में उनकी कंपनी के लॉन्चों में से दो की कीमतें साल भर में दोगुनी हो चुकी है। दपोली में पहले चरण की शुरुआत अक्टूबर 2020 और दूसरे चरण की शुरुआत अप्रैल 2021 में हुई थी और दोनों में कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं।

इसी क्षेत्र में लोढ़ा की अन्य परियोजनाओं की कीमतें अक्टूबर 2021 के बाद से 30 फीसदी बढ़ चुकी हैं। लोढ़ा ने कहा, 'खरीदार उनकी तरफ अच्छे निवेश अवसर और संपत्ति सृजन विचारों के तौर पर देख रहे हैं। वे अच्छे चीजों के लिए प्रीमियम के भुगतान के लिए तैयार हैं।' मिल रही प्रतिक्रियाओं से उत्साहित होकर वह गोवा, अयोध्या और अन्य शहरों में अगले 9-12 महीनों में भूखंड विकसित करने की योजना बना रहे हैं।     

मुंबई में एक प्रॉपर्टी सलाहकार विनित मटलानी कहते हैं कि मुंबई के बाहरी किनारों पर स्थित अलीबाग और मानगांव में कीमतें बढ़ चुकी हैं। मटलानी ने कहा कि मानगांव में भूखंड की कीमतें 2019 के 50 रुपये से 55 रुपये प्रति वर्गफुट से बढ़कर 100 रुपये से 125 रुपये प्रति वर्गफुट हो चुकी है।

मुंबई में अलीबाग का क्षेत्र समुद्री तट गंतव्य है जहां पर कीमतें 3 लाख रुपये प्रति गुंटा (275 रुपये प्रति वर्गफुट) से बढ़कर 6.5 लाख प्रति गुंटा (597 रुपये प्रति वर्गफुट) हो चुकी है। मुंबई के निकट एक पहाड़ी क्षेत्र लोनावला में कीमतें 1.5 लाख रुपये प्रति गुंटा (138 रुपये प्रति वर्गफुट) से बढ़कर 3.5 लाख रुपये प्रति गुंटा (321 रुपये प्रति वर्गफुट) हो गई।       

मटलानी ने कहा, 'कोविड के बाद लोगों ने जलाशय और लंबे चौड़े बगीचों वाले बड़े घरों पर विचार करना शुरू किया। ऐसे घर इन गंतव्यों में मौजूद हैं। मध्य आय वर्ग का खरीदार भी छोटे शहरों में भूखंड लेने पर विचार कर रहा है और इसकी वजह से मांग को दम मिला है।' उन्होंने कहा कि पहले भूखंड खरीदने वाले निवेशक होते थे लेकिन अब ये वास्तविक खरीदार हैं जो जमीन खरीदकर वहां अपने लिए घर बनाना चाहते हैं।

परामर्शकों का कहना है कि मजबूत मांग और खरीदों के आमदनी के स्तर में अच्छी वृद्घि होने से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रमुख दरों में इजाफा किए जाने के बावजूद भूखंडों की बिक्री पर कोई असर नहीं होगा।

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