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दिवालिया प्रक्रिया से जूझ रही कंपनियों पर छोटे निवेशकों ने लगाया दांव

 

दिवालिया प्रक्रिया से जूझ रही कंपनियों पर छोटे निवेशकों ने लगाया दांव

छोटे निवेशकों के करीब 2,296 करोड़ रुपये के निवेश वाली सूचीबद्घ कंपनियों को दिवालिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ा है।

ऐसी एक प्रमुख कंपनी में शेयरधारकों के तौर पर 16,163 रिटेल निवेशक थे, जिनमें से ज्यादातर ने इस उम्मीद से शेयर खरीदे थे कि कंपनी का कायाकल्प हो सकता है। ऐसी कंपनियों में उनकी कुल हिस्सेदारी में करीब 20 प्रतिशत भागीदारी रही है। विश्लेषकों ने 75 सूचीबद्घ कंपनियों पर विचार किया, जिनके लिए शेयरधारिता आंकड़ा मार्च के लिए उपलब्ध था। बाजार पूंजीकरण मार्च तक का मौजूद था। उन कुछ मामलों में पिछली कारोबारी वैल्यू का इस्तेमाल किया गया, जिनमें मार्च के लिए आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। 

रिटेल निवेशक दांव अमीर निवेशकों द्वारा किए गए निवेश के ुमकाबले दोगुने से भी ज्यादा हैं। उनकी समीक्षाधीन कंपनियों में शुरुआती आधार पर 8.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है। नई रिटेल हिस्सेदारी 22.9 प्रतिशत है।

ये निवेश दांव छोटी कंपनियों के लिए बढ़े हैं। विश्लेषकों का मानना है कि छोटे निवेशक अक्सर यह मानते हैं कि छोटे आधार से बड़े लाभ की संभावना ज्यादा रह सकती है। 

इक्विटी शेयरधारकों ने परिसमापन के तहत कंपनी की परिसंपत्तियों को लेकर अंतिम दावा किया है। कई कंपनियों ने दिवालिया प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी इक्विटी वैल्यू को बट्टïे खाते में डाला है। इसका मतलब है कि किसी शेयरधारिता की वैल्यू ऐसे मामलों में घटकर शून्य रह जाएगी। बदलाव की संभावना अक्सर कम रहती है। फिर भी नई रिटेल निवेशक भागीदारी कुल बाजार पूंजीकरण में 100 करोड़ रुपये के दायरे में आने वाली कंपनियों के लिए ज्यादा है। भारतीय रिजर्व बैंक की दिसंबर 2021 की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में कहा गया कि ऋणदाताओं ने समाधान के बाद एक-चौथाई ऋणों से कम की वसूली की।

इसमें कहा गया, 'सितंबर 2019 और सितंबर 2021 के बीच आईबीसी, 2016 के तहत 60 कॉरपोरेट देनदारों का विश्लेषण किया गया। इससे पता चलता है कि नमूने के तौर पर वसूली दर 24.7 प्रतिशत थी और लंबी अवधि के फंसे कर्ज बैंकों की बैलेंस शीट पर बने हुए थे।'

स्टॉक एक्सचेंजों ने शुरू में छोटे निवेशकों को यह समझने के लिए विशेष अलर्ट की घोषणा की थी कि वे दिवालिया प्रक्रिया से जूझ रही कंपनी के शेयरों में कारोबार कर रहे हैं।

वर्ष 2021 में एक्सचेंजों ने घोषणा की कि वे प्रतिभूति की इस तरह से पहचान करेंगे कि जिससे सदस्यों और बाजार कारोबारियों को यह पता लगाने में आसानी हो कि कंपनी मौजूदा समय में दिवालिया प्रक्रिया के अधीन है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा से मार्च के आईबीसी अपडेट में कहा गया कि सिर्फ 457 मामलों की समाधान योजना को स्वीकृति दी गई, जो दिसंबर 2021 तक दर्ज 1,514 मामलों की तुलना में काफी कम है। करीब 73 प्रतिशत मामलों को पूरा किए जाने में 270 दिन से ज्यादा का समय लगा। अपडेट में कहा गया कि 10,000 से ज्यादा मामले एनसीएलटी के पास लंबित हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया गया है या अभी तक अस्वीकृत भी नहीं किया गया है। परिसमापन के लिए भेजे गए मामलों में से सिर्फ 20 प्रतिशत को ही पूरा किया गया है।

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