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अंबुजा सीमेंट्स के बोलीदाता चिंतित

 

अंबुजा सीमेंट्स के बोलीदाता चिंतित

मजबूत डॉलर और बढ़ती ब्याज दरें अंबुजा सीमेंट्स के उन बोलीदाताओं की चिंता बढ़ा रही हैं जो सीमेंट कंपनियां खरीदने के लिए नकदी का इंतजाम करने और फिर अंबुजा तथा उसकी सहायक इकाई एसीसी के लिए ओपन ऑफर लाने की तैयारी कर रही हैं।

बैंकों का कहना है कि निजी इक्विटी कंपनियां अधिग्रहण के लिए अपने निवेश पर 20 प्रतिशत की आंतरिक प्रतिफल दर (आईआरआर) की संभावना तलाश रही है, जिससे भारतीय बोलीदाताओं के लिए अधिग्रहण की लागत काफी महंगी दिख रही है। एक बैंकर ने कहा, 'चूंकि बोलीदाताओं को भारतीय मुद्रा में आय के जरिये कर्ज चुकाना होगा, इसलिए रुपये में गिरावट अधिग्रहण लागत में वृद्घि को देखते हुए अच्छी खबर नहीं है। इस तरह से यह अधिग्रहण लागत 10 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच जाएगी।

बोलीदाताओं द्वारा ज्यादातर पूंजी की व्यवस्था निजी इक्विटी के साथ वैश्विक तौर पर की गई है और संबंधित कंपनियों के शेयरों को गिरवी रखा गया है। यदि रुपये में और कमजोरी आती है तो इससे अधिग्रहणकर्ता पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। एक बैंकर ने अपनी पहचान गुप्त रखने के अनुरोध के साथ कहा, 'अमेरिकी फेडरल दर वृद्घि के बाद ब्याज में आधा प्रतिशत की वृद्घि और रुपये में गिरावट बोलीदाताओं के लिए दोहरी अनिश्चितता है। इसके अलावा, अधिग्रहणकर्ता को दोनों कंपनियों (जिनमें होल्सिम प्रबंधन के तहत पिछले 15 वर्षो से ठहराव की स्थिति बनी हुई है) की क्षमता बढ़ाने में अतिरिक्त निवेश करने की जरूरत होगी।

अदाणी, जेएसडब्ल्यू और आदित्य बिड़ला समूह समेत सभी बोलीदाता अगले दौर की बातचीत के लिए बैंकरों और वकीलों के साथ वार्ताएं कर रहे हैं, जिनमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की मंजूरी हासिल करना, और ओपन ऑफर लाने जैसे कदम शामिल हैं। सभी तीनों समूह अपनी गैर-बाध्यकारी बोलियां पहले ही सौंप चुके हैं और होल्सिम के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

जेएसडब्ल्यू चेयरमैन सज्जन जिंदल ने कहा है कि उन्होंने होल्सिम के लिए 7 अरब डॉलर की पेशकश की है, जिसमें उनके स्वयं के 4.5 अरब डॉलर के फंड और अन्य 2.5 अरब डॉलर का निजी इक्विटी भागीदारों से निवेश शामिल है। अदाणी समूह ने सीमेंट कंपनियां खरीदने के लिए कई पश्चिम एशियाई सॉवरिन फंडों के साथ भागीदारी की है। एक बैंकिंग अधिकारी ने कहा कि अल्ट्राटेक अपने स्वयं के दम पर कोष जुटा रही है, लेकिन वह आक्रामक तौर पर बोलीदाता नहीं है।

इस अधिग्रहण से खरीदार कंपनी भारत की सबसे बड़ी सीमेंट दिग्गज बन जाएगी। अदाणी समूह पर उसकी नकदी संपन्न बैलेंस शीट और कोष उगाही क्षमता के लिए अग्रणी के तौर पर समझा जा रहा है। 114.8 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ गौतम अदाणी मौजूदा समय में ब्लूमबर्ग गेबल रिच लिस्ट में पांचवें पायदान पर काबिज हैं।

बैंकरों का कहना है कि अदाणी समूह की फिलहाल सीमेंट क्षेत्र में उपस्थिति नहीं है और इसलिए उसे अल्ट्राटेक के विपरीत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से किसी तरह की आपत्ति का सामना नहीं करना पड़ेगा। अल्ट्राटेक को पश्चिमी भारत में कई सीमेंट संयंत्र बेचने होंगे।

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