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NCLT ने Andhra Cements के खिलाफ दिवालिया की कार्रवाई का दिया आदेश, जेपी ग्रुप की है कंपनी

 

NCLT ने Andhra Cements के खिलाफ दिवालिया की कार्रवाई का दिया आदेश, जेपी ग्रुप की है कंपनी

NCLT ने फाइनेंशियल क्रेडिटर पृध्वी एसेट कंस्ट्रक्शन एंड सिक्योरिटाइजेशन कंपनी (पारस) की याचिका पर दिवालिया की कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी किया है

NCLT : नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने आंध्र सीमेंट्स (Andhra Cements) के खिलाफ कंपनी दिवालिया समाधान प्रक्रिया (CIRP) के तहत कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है। NCLT ने फाइनेंशियल क्रेडिटर पृध्वी एसेट कंस्ट्रक्शन एंड सिक्योरिटाइजेशन कंपनी (पारस) की याचिका पर यह आदेश जारी किया है।

समाधान पेशेवर की हुई नियुक्ति

एनसीएलटी की अमरावती बेंच के न्यायिक सदस्य जस्टिस तेलाप्रोलू राजानी ने 26 अप्रैल को यह आदेश जारी किया और इसे 28 अप्रैल को अपलोड किया गया है। इसके लिए नीरव के. पुजारा को कंपनी का अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) नियुक्त किया है।

बोर्ड के अधिकार हुए सीज

आंध्र सीमेंट ने एक्सचेंज को दी फाइलिंग में कहा, ‘‘आईबीसी के तहत कंपनी कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (CIRP) में है। इसकी धारा 17 के तहत कंपनी के निदेशक मंडल की शक्तियां निलंबित रहेंगी।’’ कंपनी ने इस संबंध में ट्रिब्यूनल का 26 अप्रैल 2022 का आदेश भी साझा किया। आंध्र सीमेंट ने कर्जदाताओं से 10 मई, 2022 तक अपने-अपने दावे आईआरपी के समक्ष पेश करने के लिए भी कहा है।

जेपी ग्रुप के स्वामित्व वाली आंध्र सीमेंट (Andhra Cements) का मुख्यालय आंध्र प्रदेश के गुंटूर में है। कंपनी ने 2012 से 2016 के बीच आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एचडीएफसी और करूर वैश्य बैंक सहित कई बैंकों से कर्ज लिया था।

पारस ने किया 804 करोड़ के कर्ज का अधिग्रहण

बाद में एडलवाइस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने मार्च, 2017 और मार्च, 2021 में हुए समझौतों के जरिये दो मूल लेंडर्स आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचडीएफसी से कर्ज और उससे जुड़े सिक्योरिटीज का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद पारस ने एडलवाइस और करूर वैश्य बैंक से 804.72 करोड़ रुपये के कर्ज का अधिग्रहण कर लिया था।

कंपनी को थी और फंड की जरूरत

आंध्र सीमेंट के कर्ज चुकाने में नाकाम रहने का दावा करते हुए, पारस सीआईआरपी की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए ट्रिब्यूनल में पहुंच गई थी।

आंध्र सीमेंट ने कर्ज और डिफॉल्ट की बाद को स्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल में कहा कि वर्किंग कैपिटल की कमी के चलते वह प्लांट को 60 फीसदी क्षमता से ज्यादा नहीं चला सकती है। उसने परिचालन को दुरुस्त करने के लिए फाइनेंशियल क्रेडिटर्स से अतिरिक्त समर्थन मांगा है।

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