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LIC IPO: निवेशकों की घटती दिलचस्पी सरकार के लिए बन सकती है सिरदर्द

 

LIC IPO: निवेशकों की घटती दिलचस्पी सरकार के लिए बन सकती है सिरदर्द

LIC IPO: एलआईसी के बोर्ड ने शनिवार को करीब 21,000 करोड़ में कंपनी की 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी

LIC IPO: शेयर बाजार में लगातार बिकवाली के बीच भारत सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए बेहद कम लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है। इससे देश के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्य को लेकर खतरा बढ़ सकता है।
लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के बोर्ड ने शनिवार को करीब 21,000 करोड़ में कंपनी की 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी। रूस-यूक्रेन जंग के पहले सरकार LIC में हिस्सेदारी की बिक्री से करीब 70,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती थी। इस तरह सरकार का मौजूदा लक्ष्य करीब 50,000 करोड़ रुपये कम है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एंकर निवेशक भी अधिक निवेश के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं क्योंकि जंग ने शेयरों को लेकर मांग घटा दी है। इसकी पुष्टि इससे भी होते है कि भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक इस साल अभी तक 16 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली कर चुके हैं।
भारत सरकार विदेशों से जिन चीजों का सबसे अधिक आयात करती है, उसमें कच्चा तेल और गैस शामिल है। रूस-यूक्रेन जंग के चलते इनके दाम काफी अधिक बढ़ गए हैं और ऐसे में भारत सरकार को इनके आयात के लिए अधिक पैसों की जरूरत हैं। लागत इतनी बढ़ गई है कि सरकार के लिए पेट्रोल-डीजल पर और टैक्स लगाकर बजट घाटा पूरा करना असंभव हो गया है। अगर सरकार इनके दाम बढ़ाती है तो मंहगाई तेज हो जाएगी और यह समाजिक अशांति का कारण बन सकती है, जो पहले ही भारत के कुछ पड़ोसी देशों में देखा जा रहा है।

बुधवार तक आएगी LIC IPO की डिटेल!
रिपोर्ट के मुताबिक, LIC करीब 6 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर IPO ला रही है और यह आईपीओ मई के पहले हफ्ते में खुल सकता है। अगले हफ्ते बुधवार को LIC IPO का इश्यू प्राइस, तारीख और दूसरी जानकारी आने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने पिछले साल विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि एलआईसी आईपीओ की लिस्टिंग में देरी से सरकार यह लक्ष्य एक बड़े अंतर से हासिल नहीं कर सकी। इस साल सरकार ने विनिवेश के जरिए 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, जो सफल होने पर बजट घाटे को जीडीपी के 6.4 फीसदी पर रखने में मदद करेगा।
IPO साइज छोटा होने से क्या पड़ेगा असर?
मुंबई मुख्यालय वाले वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के स्ट्रैटजिस्ट, क्रांति बथिनी ने बताया, "सरकार के लिए अपने घाटे के लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल होगा, क्योंकि IPO का साइज अब काफी छोटा हो गया है।" उन्होंने कहा, "रूस-यूक्रेन जंग ने विदेशी निवेशकों के मूड को पूरी तरह से बदल दिया है जो अब निवेश करने से कतरा रहे हैं। पहले कोरोना महामारी और फिर जंग के चलते LIC के IPO में पहले ही देरी हो चुकी है। सरकार के लिए इसे और टालना मुश्किल है।"

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